Sunday, November 27, 2011

रिटेल मे FDI.. आपका स्वागत है जी

पिछले 2 दिन से टीवी और मिडिया मे पुर जोर से रिटेल क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों के लिए खोलने का विरोध हो रहा है. यह विरोध सिद्धांतिक कम और सियासी ज्यादा है. क्योंकी हम सब सुविधा पसंद और आराम तलब लोग हो गये है. अब हमे वातानुकुलित माल की आदत सी हो गई है,  टीवी देखते हुये और बरगर पीजा खाते हुये बडी हो रही  युवा पीढी के लिये वो अब स्टेटस सिम्बोल है. जिस किसी की हेसियत उसमे खरीददारी करने की है वो वही करना चाहता है. और जो नही कर सकते है वो आइसक्रीम खाते हुये विंडो शापिंग का मजा लेते हुये उसमे एक दिन दिल खोलकर खरीद दारी करने का सपना  देखता है.


रिटेल क्षेत्र को विदेशी निवेशक कुछ वेसा ही बनाने में मदद करेगा जेसा आज कल के सुपर माल है. इन सुविधाओं की कीमत वो खरीददारों से ही वसूल करेगा. अगर ऐसा होगा तो उनके सामानों के दाम आज स्थापित छोटे दुकानदारों से ज्यादा होंगे. इसके बाबजूद कुछ लोगा गुंणवत्ता और सुविधा और स्टेटस के लिये वहाँ से ही खरीद दारी करना चाहेगे. आज उपभोक्ता का एक बडा समूह सुविधा और गुण्वत्ता और स्टेटस के लिये कोई भी कीमत देने को तैयार है. उसे जो यह दे देगा वो उसे अपने सिर आंखों पर बैठायेगा. इसलिये यह बजार अभी फिलहाल उन्ही के लिये है.

जो लोग छाती पीट कर रोने का नाटक कर रहे है वो नींद से जागे. और समय के साथ चले. वेसे भी 125 करोड़ की आबादी वाला ये देश बहुत बड़ा बाजार है. यहाँ हर किसी के लिये जगह है. पर टिकेगा वही जो उपभोक्ता के माप दंडो पर खरा उतरेगा. उपभोक्ता अब बदबूदार कीचड और धूल भरी सडकों, गायों और सुअरों की बीच खरीद दारी नहीं करना चाहता. वो अब अपनी मर्जी से और अपनी पसंद से माल खरीदना चाहता है क्या आप इसमे कोई मदद कर सकते है ...अगर नहीं ...!! तो जो करने को आ रहा है उसे आने दे.

हमने लाखों करोडों का काला धन विदेशों मे जमा करने मे शर्म नही की. उनकी संस्कृति को अपनाने मे कोई कसर नही छोडी. तो अब यह घडीयाली आंसू किस लिये. ....happy shopping

Wednesday, November 23, 2011

अलार्म बजते ही सुबह नींद से कैसे उठे

रात को सोने से पहले आपने सुबह उठने के लिये अलार्म लगाया और गहरी नींद में सो गये. सुबह अलार्म बज उठा... मन और शरीर अभी भी सुबह की मीठी नींद का मजे ले रहा है और यह अलार्म!...हाथ अपने आप बजते अलार्म को बंद कर देते है. आप का उनींदा मन सोच रहा है..उफ्फ क्या मुसीबत है ये अलार्म ....क्या मीठी नींद है... क्या अभी ऊठना जरूरी है?..क्या हो जायेगा अगर 5 मिनिट और आराम कर लू!..अभी तो समय है ...मेने बेकार में इतनी सुबह अलार्म लगा दिया...औ...र. फिर से गहरी नींद...


1 घंटे बाद......हे भगवान ..आज फिर लेट...आप बिस्तर से उछल पडते है और देर से उठने के लिये अपने आप को कोसने लगते है. पेट पर बढती चर्बी, एक्सरर्साइज ना करने का गुस्सा. गुस्सा आ रहा है की क्यों अलार्म के बजते ही बिस्तर से नही उठे. शायद आज बिना नाश्ते के जाना होगा स्टाफ बस तो अब मिलने से रही...टेक्सी से जाना होगा और आफिस में बोस की घूरती आंखों का सामना...उफ्फ क्या जिंदगी है!!....

हर रोज ऐसा ही होता है रोज अलार्म लगाओ...उसके बजने पर ना उठो और फिर देर से उठने के लिये खुद को कोसने लगो. ऐसा क्यों होता है...सुबह अलार्म बजते ही मन ना उठने के बहाने क्यों खोजने लगता है. जेसे वो मन आपका नहीं किसी और का हो!.

आप में अनुशासन की कमी नहीं है, आप में इच्छा शक्ति भी भरपूर है. पर सुबह की मीठी नींद में जेसे अनुशासन धरा का धरा रह जाता है और इच्छाशक्ति हवा हो जाती है. रात जिस उम्मीद के साथ अलार्म लगाते है ...सुबह की मीठी नींद सब उम्मीदों पर पानी फेर देती है. जब तक कोई मुसीबत ना आ जाये तब तक सुबह उठने का मन ही नहीं करता.

ऐसा हम सब के साथ होता है ...मेरे साथ भी यही सब होता था ...पर अब नहीं होता. अब जब में सुबह उठता हू तो कोई आवाज मेरे मन में नहीं उठती. मुझे उठने के लिये चेतन मन की कोई जरूरत नहीं है इसलिये ना कोई चेतन को सवाल ना उससे किसी जबाब का इतिंजार. कोई सवाल-जबाब नहीं. अलार्म बजा और स्वत: ही उठने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है वेसे हि जेसे पेव्लोग का कुत्ता अलार्म बजते ही खाने के लिये तैयार हो जाता था.

अब अलार्म बजते ही मेरी आंखे धीरे से खुलती है ..हाथ की उगलिया अलार्म बंद करती है और फिर गहरी सांस लेकर फेफडो में हवा भरता हू...एक भरपूर अगडाई लेता हुआ बिस्तर से उठता हू, दो गिलास पानी पीकर बाथरूम की तरफ बढ जाता हू. सब कुछ जेसे अपने आप होता है जेसे में कोई रोबोट हू. ना कुछ सोचने की जरूरत ना ज्यादा कुछ समझने और समझाने की जरूरत.

बाथरूम में ब्रश करते हुये नींद पूरी तरह भाग चुकी होती है. सुबह की ताजी हवा मे सांस लेते हुए नये दिन का स्वागत करने के लिये मन और शरीर तैयार है...यह सब कैसे संभव हो गया इसे समझने के लिये हमे अपने मन को समझना होगा.

आप ने नोटिस किया कि रात को जब आप अलार्म सेट करते हो और सुबह जब उठने की कोशिश करते हो उन दोनों समय में हमारे दिमाग की सजगता एक सी नहीं होती. रात को दिमाग अलार्म लगाते हुये जितना सजग था, सुबह अलार्म बजते समय उतना ही उनींदा, सुस्त, अक्षम. सुबह उठने का निर्णय आप इस उनींदा, सुस्त, अक्षम चेतन मन से कराने की कोशिश करते हो जो बहुत कुछ उस समय अवचेतन मन के बस में है.

हमे लगता है की हमे और कडे अनुशासन और ज्यादा इच्छा शक्ति की जरूरत है इसलिये हम उतने ही जोरादार तरीके से अपने को कोसने लगते है. पर सुबह नींद मे तो हम अवचेतन मन के बस में है और अवचेतन मन अनुशासन नहीं समझता वो तो आदत का गुलाम है. शरीर को ज्यादा से ज्यादा आराम देने लिये प्रतिबद्ध. उस समय चेतन मन तो उनींदा, सुस्त, अक्षम है, वो कैसे कोई ठीक निर्णय कर सकता है. इच्छा शक्ति और अनुशासन चेतन मन समझता है. अवचेतन पर इसका कोई असर नहीं होता है.

आपको अनुशासन और इच्छा शक्ति की जरूरत तब ज्यादा होती है जब आप पूरे होश में हो. आप सुबह के उनींदा, सुस्त, अक्षम चेतन मन से अनुशासन की उम्मीद कैसे कर सकते है. हम कई बार अलार्म बजते ही उठ जाते है पर उसकी वजह डर या चिंता होती है. शायद यही वजह है की अगर सुबह ट्रेन पकडनी होतो अलार्म बजते ही आप बिस्तर से उछल पडते है. अब अगर सुबह उठने का काम भी डर के साथ करना चाहते हो तो आपकी मर्जी. पर जो काम एक आदत को बनाने से हो सकता है उसके लिये डर को वजह बनाना कहां की अक्लमंदी है.

इसके लिये आप को आदत बनानी होगी बेसे ही जेसे आप ने कार चलाना सीखने के लिये बनाई, याद है पहली बार जब आप ने कार चलाना सीखी तो आप का पैर ब्रेक और एक्सीलेटर खोजता था और हाथ स्टेयरिग और साईड इंडीकेटर नोब के बीच उलझे हुये और आंखे ...फिर कुछ ही हफ्तों से जेसे जादू सा हो गया. सब कुछ जेसे अपने आप होने लगा था. सब स्वत: होने लगा. एसे ही आप को एक ओर नई आदत बनानी होगी....सुबह अलार्म बजते ही उठने की आदत.

कुछ दिन आप को अलार्म के बजते ही उठने की आदत बनानी है, पर यह काम आप को उनींदी सुबह में नहीं करना है. इसे तो पूरे होश और हवास में कुछ दिन दोहराना है. तब तक दोहराना है जब तक की वो आपकी आदत ना बन जाये. एक आदत जो सुबह का अलार्म बजते ही स्व्त: ही उठने की आदत. किसी अनुशासन और इच्छा शक्ति के बिना. बस एक आदत. इसके लिये आपको ड्रामे की रिहर्सल नीचे दिये स्क्रिपट के अनुसार कुछ दिन तक करनी होगी,

अपने बेडरूम में 10 मिनिट बाद का उठने का अलार्म सेट करो. और सोने के लिये जो भी तैयारी करनी हो उसे करो. जेसे अगर सोने के लिये नाईट ड्रेस पहनते हो तो उसे पहन लो. रात को सोने से पहले अगर ब्रश करते हो तो उसे कर लो. सोने से पहले अगर चशमा उतारते हो तो उसे उतार दो. कबंल ओढ्कर एसे लेटो जेसे सच में सो रहे हो. जेसे ही अलार्म बजे तो जागने का अभिनय करते हुये उसे बंद करो. अगडाई लेते हुये फेफडो में सांस भरो और उठ जाओ जा कर एक गिलास पानी पीओ ओर बाथरूम जाओ. यानी की वो सब करो जो सुबह उठते ही करना चाहते हो.

अब इस क्रम को बार बार दोहराओ कम से कम एक दिन में तीन चार बार...कुछ दिनों तक करते रहो.. कुछ दिन में यह आपकी आदत बन जायेगी. इस पूरे ड्रामे को दिमाग में भी दोहरा सकते है पर मेरी राय है की कुछ दिन आप इसे करके देखे उसके बाद आप चाहे तो इसे दिमाग में दोहरा कर भी इसकी प्रेक्टिस कर सकते है.

बस आपको इतना ध्यान रखना है की इस ड्रामे को करते समय चेतन मन में उठने वाले सवालों पर ध्यान नहीं देना है. हो सकता है की आपका चेतन मन आपको बोले की क्या बेवकूफी कर रहे हो....याद रखो यही वो चेतन मन था जिसने पहली बार जब आपने कार चलाना सीखी थी तो कितना डराया था. तब आप ने इस की नहीं सुनी और आप ने अपनी इच्छा शक्ति का इस्तेमाल करते हुये वही किया जो आपके अंतरमन में था तो आज भी आप इसकी नही सुनों आपकी यह सुबह अलार्म बजते ही उठने का ड्रामा करने की आदत को अपनी इच्छा शक्ति का इस्तेमाल करते हुये इसे करो. और उसके जादू भरे परिणाम की प्रतिक्षा करो. विशवास करो आप को कार सीखने में लगे समय से बहुत कम समय इस आदत को सीखने मे लगेगा.

सोचो इस आदत को सीखते ही आपकी जिंदगी कितनी आसान हो जायेगी...कितने रुके हुये और उलझन भरे काम आसानी से आप अब कर पाओगे वो भी बिना किसी अतिरिक्त डर या चिंता के..

जितनी बार आप प्रेक्टिस करेगे वो उतने गहरे में आपके मन मे उतर जायेगा. अलार्म बजा...तो उठना है.... अलार्म बजा...तो उठना है. एक बार यह आपकी आदत बन गई तो फिर उसके बाद सब आसान ...फिर आपके मन में सुबह कोई सवाल जबाब नहीं होगा..अलार्म बजेगा और बिस्तर छोडने की प्रक्रिया स्वत: ही चालू हो जायेगी. यह आसान सा प्रयोग आपको आपके अव चेतन मन के काम करने के तरीके के बारे में आपकी समझ को बढायेगा.





Sunday, November 20, 2011

साइकिल..जरा याद इन्हे भी कर ले!

हमारे देश के मध्यम वर्ग एवं उच्च वर्ग के युवा लोग साइकिल चलाने की सोच भी नहीं सकते, ये आधुनिकता के परिणाम ही है कि किशोर होते ही वे मोटर साइकिल और कार चलाना चाहते है और पैदल चलना या साइकिल चलाना अपनी शान के खिलाफ समझते है. जीवन मूल्यों मे यह बदलाव पिछले तीन दशक मे तेजी से हुआ है.

कुछ दशकों पहले फिल्मों में हीरो होरोईन साइकिल का प्रेम गजब का था. ये वो जमाना था जब साइकिल गली महोल्ले की शान होती थी. जब साइकिल खरीदी जाती थी तो उसकी खुशी में सबको मिठाई खिलाई जाती थी. बच्चे अपने पापा का शाम को दफ्तर से आने का बेसब्री से इंतिजार करते थे की कब पापा आयें और साइकिल चलाने को मिले. अगर उनके पास साइकिल होती तो वो शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक जाने में कोई झिझक महसूस नहीं करते थे. पिता खुश होकर अपने बच्चों को साईकिल इनाम में देते. स्कूल में जिस के पास साइकिल होती थी उसकी शान ही अलग होती.

जमाना बदल गया. साइकिल की जगह अब स्कूटी और मोटर साइकिल ने ले ली पिछले दो दशक में तो जेसे चार पहिया वाहनों की बाढ़ सी आ गयी है. ऐसे समय में साइकिल को अती गरीब की सवारी मान लिया गया है. इस गला काट जिंदगी में जब हमारे जीवन मूल्य तेजी से बदल रहे हो तो आपको मेरा साइकिल के बारे में बात करना अजीब लग रहा होगा. 

उन्नत देशों में साइकिल प्रेम बढता जा रहा है. कार चलाते चलाते और हवाई जहाज उडाते उडाते उन्हे अब इसकी अहमियत मालूम हो गई है. वेसे भी वहां के युवाओं और किशोरों में अब भी साइकिल प्रेम बाकी है. ये उनके यहां स्पोर्ट टीवी पर दिखाई जाने वाली प्रतियोगिता में उनके उत्साह को देखकर समझा जा सकता है. वहां की सरकारे साइकिल संस्कृति को बढावा दे रही है. व्यस्त मार्गों पर साइकिलों के लिए अलग से ट्रैक निर्माण तथा लोगों को साइकिल संस्कृति से जोड़ने के लिए पब्लिक और प्राइवेट वाहनों में साइकिलों को समुचित रूप से टांग सकने के लिए विशेष प्रकार के कैरियर लगवाना साइकिल के प्रति उनके समर्पण को दिखाता है. स्कूलों में साइकिल स्टंट के लिये विशेष साइकिल का प्रचलन और उसके लिये अलग से साइकिल ट्रेकस का निर्माण.

पश्चिम की बुराईयों को आसानी से हमने अपना लिया हमारे बुजुर्ग रात दिन उन बुराइयों क लेकर अपना सिर पीटते रह्ते है पर पता नहीं क्यों हम उनकी इस अच्छाई को क्यों नहीं अपना पाये. आज प्रदूषित महानगरीय जीवन शैली में साइकिल और भी प्रसांगिक हो गई है. अगर आपको लगता है कि साइकिल वहां सिर्फ गरीबों की सवारी है या इसे सिर्फ गांवों में चलाया जाता है तो आप गलत हैं । शायद आपको नहीं पता कि हालीवुड की सेलिब्रिटी मैडोना एक प्रसिद्ध साइकिल चालक हैं।

हमारे यहां तो सरकारी नियम और कानून सब साइकिल विरोधी है. यहां तक की ट्रेफिक हवलदार भी साइकिल सवार को पहले पकडता है. ट्रेफिक नियम साइकिल सवारों और पैदल चलने वालों के सबसे बाद में प्राथमिकता देते है. एसे में साइकिल केसे बनी रह पायेगी. धूल और कीचड से सनी गढों के बीच से गुजरती खस्ता हाल बरबाद सडकों से घिरे इन शहरों और कस्बों में साइकिलों के लिए अलग से ट्रैक एवं पार्किंग विकास एक मजाक सा लगता है.

यहां तक की सरकारी गेर सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थानों में साइकिल पर आने वाले कर्मचारी को चार पहिया वाहन वाले से आने वाले कर्मचारी की तुलाना में बेहद कम कनवेंस एलाउंस मिलता है. जबकीइंधन बचाने और पर्यावरण बचानेके नाम पर उसे सबसे ज्यादा एलाउंस मिलना चाहिये. गेट पर खड़ा गेटकीपर भी साइकिल से आते कर्मचारी को हिकारत की नजरों से देखता है जेसे वो कोई कर्मचारी ना होकर चोर हो. पर कार को देखते ही तनकर स्लूट मारता है.

क्या आपने कभी सोचा है कि फैंसी जिम या उच्च प्रोफ़ाइल प्रशिक्षकों के बिना भी आप अपने आपको फिट रख सकते हैं । इसके लिये आपको सिर्फ कुछ देर साइकिल के पैडल घुमाने हैं । अगर चिकित्सकों की या शोधकर्ताओं की मानें तो फिट रहने के लिए साइकलिंग सबसे प्रभावी और कम लागत वाला नुस्खा है। साइकिल चलाना शरीर के लिए संपूर्ण व्यायाम है । साइकलिंग से रक्त का प्रवाह ठीक रहता है और यह आपके पैरों को सही आकार देता है । शहरी युवाओं में रीढ़ की हड्डी की समस्या बहुत ही आम है और साइकिल चलाने से आपकी रीढ़ की हड्डी को मजबूती मिलती है । अमेरिकी कॉलेज आफ स्पोर्टस मेडिसिन की पत्रिका में छपे शोध के अनुसार वो बच्चे जो साइकिल से स्कूल जाते हैं वो उन बच्चों की तुलना में ज्यादा सक्रिय होते हैं जो यातायात का कोई और साधन अपनाते हैं।


शहरों में एक सर्वे से पता चला की हमारे 70% से ज्यादा रोजमर्रा के काम 2 किलोँमीटर की परधी में हो जाते है. जो आसानी से साइकिल चलाकर हम पूरा कर सकते है. साईकिल एक जीरो फ्यूल वाली एक बेहद सबसे सस्ती सवारी जो आसानी किसी भी उबड खाबड सड़क पर निकल जाती है. क्या ही अच्छा हो की स्थानीय स्तर पर पार्षद अपने क्षेत्र में साइकिल और पैदल चलने वालों के लिये साफ और सुरक्षित पथ बनवायें. साइकिल प्रतियोगिता करा कर इसको किशोरों और यूवाओं में बढावा दे. पब्लिक वाहनों में एसी सुविधा हो जिससे उसमे साइकिल लादी जा सके जिससे गंतव्य पर पहुचने पर बाकी का सफर साइकिल से कर सके.

अब समय आ गया है कि हम साइकिल को पर्यावरण का दोस्त मानकर उसे सम्मान की दृष्टी से देखे और उसे चलाने वालों को पूरा सम्मान देते हुये उन्हे जाने की पहली प्राथमिकिता दे. हमारी सेहत का ख्याल रखने वाली हमारी सबसे अच्छी डाक्टर साबित हो सकती है. साइकिल चलाना अपने आप में एक विशेष अनुभूति होती है बशर्ते साइकिल चलाने वाले में इस विशेष अनुभूति का अनुभव करने की ललक हो

कुछ दिन हमने भी साइकिल चलाई थी और आफिस भी गये. पर इस दोरान जो झेला उसे फिर किसी दिन बयान करेगे. अभी तो फिलहाल बस इतना कह सकते है की इस देश के योजनाकारों और निंयताओं की नींद खुले और साइकिल जेसे छोटे छोटे पर अति महत्वपूर्ण पहलुओं पर उनकी नजरे इनायत हो. लाखों करोड रूपये पेट्रोल सब्सिडी पर फूंक देने वाली सरकार अब साइकिल पर भी ध्यान दे और साइकिल संस्कृति को बढावा देने के बारे मे गंभीरता से सोचे.   सब्सिडी के जाल मे उलझे इस देश को इससे थोडी तो राहत मिलेगी.


Friday, November 18, 2011

YHAI मेम्बर शिप क्यों!!!



YHAI मेम्बर शिप क्यों!!!




यूथ होस्टल एशोसियेशन आफ इन्डिया अनखोजे अनजाने या फिर जाने पहचाने लोकल ट्रेक राष्ट्रीय ट्रेक और साहस और रोमांच से भरपूर खेल कराती है...

  • क्या आप परिवार के साथ छुट्टीयां प्लान कर रहे हें?
  • क्या दोस्तों के साथ ट्रेकिंग या घूमने का प्रोग्राम बना रहे है?
  • क्या आप विदेश जा रहे है?
  • क्या आपका स्कूल विद्यार्थियों के लिये टूर पैकेज प्लान कर रहा हे?
  • या फिर ठहरने के लिये सस्ते पर साफ-सुथरे बजट होटल और होस्टल की तलाश है

फिर इंतिजार किस बात का यूथ होस्टल्स एसोसियेशन ओफ इंडिया के मेम्बर बन कर यह सब सभंव करें।

मेम्बर शिप के फायदे:
  • 48 से ज्यादा जगहों पर यूथ होस्टल के सस्ते होस्टल में ठहरने की सुविधा
  • यह मेम्बरशिप कार्ड पूरी दुनिया के बेहतरीन 4500 जगहों पर काम आता है
  • समय समय पर आयोजित होने वाले एडवेंचर और ट्रेकिंग प्रोग्राम में भाग ले सकते हे
  • निरुला रेस्टारेंट में YHAI मेम्बर को डीस्काउंट।
  • GTDC (Goa tourism development corporation) होटल में डीस्काउंट।
  • HPTDC (Himachal Pradesh Tourism Development Corporation) के होटल और ट्रासपोर्ट में डीस्काउंट।
  • UP (Run by UP State Tourism).ट्यूरिस्ट होटल के होटल और ट्रासपोर्ट में डीस्काउंट।

 मेम्बरशिप की विभिन्न दरें जानने के लिये YHAI साईट पर क्लिक करे

मेम्बरशिप लेने के लिये मेम्बरशिप फार्म डाउनलोड कर उसे पूरी तरह भरकर एवं उसके साथ

• 1-फोटो ( 2फोटो लाइफ मेम्बरशिप के लिये)
• मेम्बरशिप शुल्क का डिमांड ड्राफ्ट in favour of "YOUTH HOSTELS ASSOCIATION OF INDIA" payable at New Delhi.
• Identity cum address proof के लिये (पासपोर्ट , वोटर कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कोपी जरूरी है

यूथ होस्टल्स एसोसियेशन ओफ इंडिया , बी एच ई एल भोपाल यूनिट की सदस्यता पाने के लिये आप भरा हुआ फार्म  नीचे दिये पते पर जमा कर सकते है-

 यूथ होस्टल्स एसोसियेशन ओफ इंडिया

 बी एच ई एल भोपाल यूनिट
कार्यालय: 05/N-3/'D'-सेक्टर बरखेडा भोपाल-462021
मेल: yhaibhel@bhelbpl.co.in

Thursday, November 17, 2011

जेम्स फोरसिथ पगडंडी पर बीएचईएल भोपाल यूनिट के सदस्यों ने की साहसिक ट्रेकिंग

पचमढ़ी हिल स्टेशन के खोजकर्ता कैप्टन जेम्स फोरसिथ द्वारा वर्ष 1862 में पहली बार जिस रास्ते का इस्तेमाल किया, उसी रास्ते पर यूथ होस्टल्स एसोसियेशन ऑफ़ इंडिया बी.एच.ई.एल.इकाई भोपाल, के 39 सदस्यों ने दिनांक 13/11/11 से 15/11/11 तक तीन दिवसीय साहस और रोमांच से भरे ट्रेकिंग कार्यक्रम ’’री विजिटिंग फोरसिथ लैण्ड’’ मैं हिस्सा लिया.


इस अनोखे ट्रेकिंग कार्यक्रम को 10 से 17 नवंबर तक सतपुडा टाईगर रिजर्व होशंगाबाद द्वारा  पचमढ़ी खोज के 150 वर्ष पूर्ण होने और मध्यप्रदेश के वन विभाग की स्थापना के 150 साल पूरे होने के अवसर आयोजित किया.

इस यात्रा को ’’री विजिटिंग फोरसिथ लैण्ड’’ नाम दिया गया। विभाग के मुताबिक इसी पगडंडी से जाकर कैप्टन जेम्स फोरसिथ ने पचमढ़ी की खोज की थी। 1862 में बनाया गया यह रास्ता सैलानियों के लिए बंद था। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा इस अतिदुर्गम पर्वतों के बीच से जाने वाले इस मार्ग को पहली बार ट्रेकिंग के लिये खोला गया। लगभग 37 किमी के इस दुर्गम रास्ते पर ट्रेकिंग करने का बेहद रोमांचक अनुभव इस टीम ने किया हैं। रास्ते में वन्य प्राणियों और दुर्लभ वनस्पतियों की महत्वपूर्ण जानकारी के साथ ही वहां रह रहे वनवासीयों से मुलाकात और उसकी संस्कृति जानने का मोका इस टीम को मिला.

मध्य प्रदेश के प्रभारी वनमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर समूह को जिप्सी वाहनों से रावाना किया. दल झिरपा होते 21 किलोमीटर का सफर तय कर दोपहर के भोजन के समय तक झेला कैम्प तक पहुचा. रास्ते मे सात धारा पर थोडी देर का विराम दिया गया जिससे सदस्य मनोहारी दृश्य का मजा ले सके.
झेला कैम्प ट्रेकिंग का पहला पडाव था। इस स्थल पर ईको पर्यटन से संबंधित शैक्षणिक; मनोरंजक तथा साहसिक गतिविधियॉ संचालित की गई और रात्रि मे यही दल के सभी सदस्यों ने विश्राम किया।

दूसरे दिन सुबह झेला केम्प से पैदल देनवा नदी के किनारे ट्रेकिंग आरंभ कर  9 किलोमीटर ट्रेक करते हुये दल दोपहर 2 बजे कांजीघाट पहुचा. दोपहर का भोजन करने के बाद यहॉ सभी ट्रेकर्स कमाण्डो नेट तथा बर्मा ब्रिज जैसे साहसिक खेलों में सम्मिलित हुए। रात्रि में स्थानीय वनवासीयों ने केम्प फायर के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य पेश किया.

तीसरे दिन कांजीघाट से सुबह चल कर दल दोपहर बाद पचमढी मे बायसन लॉज पहॅचा। वर्तमान मे पचमढी मे जो बायसन लॉज है कभी वह जेम्स फोरसिथ का आश्रय स्थल था उन्होने ही इसे बनाया था। वन प्रांतर मे स्थित साज;साल; सरई; सर्रू; हर्रा; आम जामुन; महुआ के वृक्ष और बल खाती देनवा नदी और उसके स्वच्छ जल के झरनों दुर्गम पहाडियो के बीच इस टेकिंग का अपना खास महत्व रहा।


Wednesday, November 16, 2011

how to meditate



When we listen good music, natural scene like sun set or sun rise one feels good as it takes us to a  relax state of mind. However meditation goes beyond simple state of relaxation, it brings a complete thought less relaxed mind. Music, reading or visualization is not suggested in meditation as it  can bring some amount of thoughts.
We know that thoughts and emotions are like violent water waves over the surface of pond. when it occurs we can not see bottom of pond, but when  these waves are silent one can see the bottom of pond clearly. In a similar way thought less relaxed mind is like a pond water with no waves. Salient but alert mind is not a easy task. bcause alert mind is always surrounded with some kind of thought and emotion generated by conscious and subconscious mind.
But if some way such silence is achieved, it  helps meeting your super conscious hidden deep in our mind...whenever such event occurs one  may experience it like meeting a god. it will not happen in just one day..but if one practice regularly, it is most likely to meet your god one day.
To start meditation choose time and place where you can have your privacy and no external disturbance like mobile and TV for the time meditation is done. Choose a place where you can perform this repeatedly over a long period of time. Do some breathing and starching exercise as it help distress your self and prepare mood for meditation. It is not mandatory but it is desirable as one can train mind easily if it done repeatedly the same way and at same place. It means as soon as u will enter in the room and do exercise mind will understand that its time to meditate. It is similar to the events like when we see toilet and feel like going toilet. Whenever we see kitchen we salivate for eating something…whenever we see tv we search remote. And whenever we see deities picture our hands lift and eyes closes for prayer.

follow following sequence for practicing meditation:
  1. Sit at one place with closed eyes and doing nothing, not a easy task to start with, as sudden itching sensation..pains will start appearing in different part of body which will keep on distracting or disturb your mind. Your mind will compel you to move …and provoking thought one after another will try to overcome you. to prove that whatever you are doing is a  bull shit. Don't listen to it after few session this will disappear. As you feel comfortable increase time
  2. Posture is not very important. But I prefer sitting on chair and hands on my lapse spine erect or otherwise sitting on ground with crossed legs hands resting on ankle with palms up and keeping spine erect and straight.
  3. If successful then start noticing emotion, thought, words appearing in mind from next time onwards. But don’t give attention to it and don’t start any dialogue with it. with time these emotions, thoughts and words start reducing in quantity and intensity and you will slowly start drifting towards heaviness and feel sleepy. Certainly a good sign.  micro sleep are normal but avoid long duration of sleep.
  4. If you are really feeling too sleepy,  it only means that your body need rest…so allow it to sleep but remember when you are awake continue meditating at least for 5 minutes before leaving place. Believe me it will give an wonderful feeling.
  5. Otherwise one can overcome uncontrolled sleepiness by doing meditation with half open eyes.Doing with sitting posture while keeping spine erect and straight will also help avoiding sleepiness. This is considered to be difficult stage one has to be persistence. soon you will be able to do it effortlessly.
  6. After some time, mind and body will learn to stay calm and awake without doing anything and mind without indulging internal and external dialogue.
  7.  After few days practice you may experience one or all of this with no particular order during meditation 
    1. A color full patterns start at centre of the eyes. Or a bright light or a certain color remains 
    2. You may start seeing glimpse of picture or short dream about known or unknown
    3. Picture of your deity or guru may appear
    4.  You may experience sudden numbness in certain body part or feeling pains and fatigue
    5. You may hear noise, music or unexplained sound
    6. You may experience vibrations at different part of body. Some time feeling as if whole body expanding and contracting in rhythm.
    7. Some time feeling like floating in air.
    8. Some times your nose may fill with smell…bad or good
    9. Some time your old memories may become alive as dream.
    10.  Some time you see a new place meet new people in dream like situation
    11.  Not aware of your body and time, as if you were  unconscious
I m also at step 7 and experiencing (a) to (k) at different times of meditation. so can not comment more then that on meditation, it is not that important , what you feel during meditation. more important how you feel after meditation.
one thing for sure that after effects of meditation are wonderful.  As I am progressing my mind body relationship getting better day by day. My quality of life is improving. nagging, anxiety, anger reduced to great extent. No prolong state of anger or fear. experiencing full of energy, good quality sleep in less hours.... means more time to devote for my hobbies and interest. World around me looks more friendly.

Mediation experience can't be explained, it can only be felt by an individual, regualr practice of it creates an extra ordinary state of mind and body. It gives us something extra ordinary. Something beyond the approach of our logical active mind. On a scale of 0 to 10 one can have varying degree of meditation even having meditation at level of 2-3 when one feel like state of relaxation can create wonders to us. So when ever possible have it, experience it and enjoy it. just keep practice and ripe the fruit of true joy and happiness. 





मस्तिक तंरगे(Brain wave)

वैज्ञानिक शोध से पता चला की मस्तिक विद्युत तंरगे पैदा करता है. इन मस्तिक तंरगो का व्यक्ति के मन स्थति के अनुसार एक निश्चित पेटर्न होता है. जिसे माप कर व्यक्ति के दिमाग के क्रिया-कलाप के स्तर का पता लगाया जा सकता है. यह पता लगा है की क्रियाशील दिमाग बीटा विद्युत तंरगे पैदा करता है जिसकी आवृति 15 से 40 चक्र हो सकती है. सक्रिय बातचीत में भी एक व्यक्ति बीटा तरंगों पैदा करेगा इसी तरह एक भाषण, देने वाला या एक शिक्षक क्लास में बच्चों को पढाते समय बीटा तंरेगे पैदा करेगे, वंही झगड़ने वाला उच्च बीटा में होगा.


अगली अवृति श्रेणी की तरंग अल्फा है. जहाँ बीटा उत्तेजना का प्रतिनिधित्व करती है, वही अल्फा गैर उत्तेजित मन का प्रतिनिधित्व करती है. अल्फा मास्तिक तंरगे की आव्रति कम है, पर आयाम में ये बीटा से उच्च हैं. इनकी आवृत्ति 9 से 14 चक्र प्रति सेकंड हो सकती है. एक व्यक्ति जो किसी कार्य को पूरा कर आराम करने के लिए बैठता है उसका दिमाग अल्फा तंरगे उतस्रजित करने लगता है. बगीचे में टहल रहा वयक्ति का दिमाग भी अकसर अल्फा स्थति में होगा

अगली श्रेणी, थीटा मास्तिक तंरगे की आती है, ये भी पहले वाली से अधिक आयाम और धीमी आवृत्ति होती है. थीटा मास्तिक तंरगों की आवृत्ति रेंज आम तौर पर 5 और 8 चक्र है. एक व्यक्ति जो उनींदा सा हो, अक्सर उसका मास्तिक थीटा स्थति में होगा. जेसे एक व्यक्ति अगर हाईवे पर गाडी चला रहा हो, और उसे याद नहीं की पिछले 1-2 मील कैसे गुजर गये तो संभवत: उसका दिमाग थीटा मास्तिक तंरगे में होगा. जो अकसर हाईवे ड्राइविंग की प्रक्रिया की एकरस्ता से प्रेरित हो जाता है. ट्ढी मेडी घुमाव दार उबड खाबड सडके ड्राईवर को सजग बीटा स्थति में रेखेगी वही हाइवे पर अकसर ड्राइवर थीटा मास्तिक तंरगे की स्थति का अनुभव करेगा.

अकसर थीटा मास्तिक अवधियों के दौरान अच्छे विचार आने लगते है. यह स्नान करते हुये या हजामत बनाते या ब्रश करते हुये भी हो सकता है यह एक स्थति है जहां कार्य तो स्वत: हो जाते हैं और मन कही और होता है. थीटा स्थति के दौरान विचार अक्सर मुक्त प्रवाह के होते है और सेंसरशिप या अपराधबोध के बिना होता है. यह आमतौर पर एक बहुत ही सकारात्मक मानसिक स्थिति है.

अंतिम मास्तिक तंरग स्थति डेल्टा है. यहाँ मास्तिक तंरगे सबसे बड़ा आयाम और धीमी आवृत्ति के हैं. वे आम तौर पर 1.5 से 4 चक्र प्रति सेकंड होती है. यह कभी भी शून्य नहीं हो सकती क्योंकी तब इसका मतल्ब मृत मस्तिष्क होगा. लेकिन, गहरी स्वप्न रहित नींद में यह सबसे कम आवृत्ति 2 से 3 चक्र तक जा स्कती है.

जब हम बिस्तर पर नींद से पहले कुछ मिनट के लिए पढ़ते तो मस्तिक तंरगे का लो बीटा में होने की संभावना होती हैं. जब हम पुस्तक नीचे रख आँखें बंद करते है तो अल्फा या थीटा स्थति में हो सकती है. अंत में, जब नींद से भारी पलके हमे मस्तिक को डेल्टा तरंग़ में होने का संकेत देती है. रात भर की नींद में हम कई बार इन चारों स्थति में से गुजरते है इन चारों स्थतियों का एक चक्र करीब 90 मिनिट में पूर्ण होता है इस तरह रात भर की नींद में हम 4 से 6 चक्र पूरा करते है.

संक्षेप में सभी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का मस्तिक इन चार मास्तिक तंरग स्थतियों जो उच्च आयाम, कम आवृत्ति डेल्टा से कम आयाम, उच्च आवृत्ति बीटा की विभिन्न स्थतियों का मिश्रण होता है, से गुजरता है. अनुसंधान में देखा गया की कीसी भी स्थति में यह चार प्रकार कि तंरगे का मिश्रित सवरूप हमारे मस्तिक में बनता रहता है. पर मन स्थति के अनुसार उनमे चारों प्रकार की तंरगो के ताकत अलग अलग हो सकती है. गहरी नींद में बीटा तरंगे अपने सबसे सूक्ष्म स्थति में होती है. वही पूर्ण सजगता में डेल्टा तंरगे बहुत कमजोर होती है. किसी एक प्रकार की मास्तिक तंरग स्थति का प्रबल होना, व्यक्ति की गतिविधि के स्तर के आधार पर हो सकता है, शेष तीन मस्तिष्क तंरगे भी मिश्रत अवस्था में रहेगी पर उनकी स्थति पहली वाली से कमजोर रहेगी. इस तरह इन चारों प्रकार कि तरंगो का आपस में साक्षेप स्थति उस समय मन स्थति तय करेगी.

प्रयोगों से देखा गया की बाहरी कारण इन तंरगों को सीधा प्रभावित करते है. मेरा व्यक्तिगत अनुभव है की इन ब्रेन बेव्स को बिना किसी रासायनिक ड्रग को लिये बिना भी आसानी से बदला जा सकता है. इस तरह इनका उपयोग हम अपने मस्तिक कि कार्य क्षमता को बढाने में कर सकते है. आसानी से किसी भी समय रिलेक्स फोकस और क्रीयेटिव हो सकते है. जरूरत पढने पर गहरी नींद मे जा सकते है या फिर उनींदे दिमाग को चाय या काफी पिये बिना सजग बना सकते है.

हम इन मस्तिक तंरगों को नियंत्रित कर हम मन की विभिन्न स्थ्ति पर काबू पा सकते है. और काफी हद तक उसे मन चाही स्थति में ला जा सकते है. अब जेसे पिछले उदाहरण में हाइवे पर ड्राइव करने की स्थति में मस्तिक में उठती थीटा तंरगे ड्राइवर को आंनद और ताजगी का अनुभव कराती है और वो आरामदायक स्थति का अनुभव करता है. पर ड्राइव करने वाले के लिये यह खतेरे कि स्थति हो सकती है क्योंकी उसके तुरंत बाद मस्तिक डेल्टा स्थति में जाने के लिये तैयार रहता है. जो एक निद्रा की स्थति बनकर अनेक बार एक्सीडेंट का कारण बन जाती है. अब ड्राइवर एसे उपाय कर सकते है जिससे अपने को थीटा स्थति में जाने से रोक सके. अब तक ड्राइवर ठंडे पानी के छींटे आंखो पर मार कर, चाय और सिगरेट पीकर अपने को उस स्थति में जाने से रोकते थे. अब उससे बेहतर उपाय खोज लिये गये है.

एसे बहुत सारे रासायनिक और भौतिक उपाय है जिनसे इन तंरगों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. चरस और गांजा का सेवन कर अकसर लोग गहरी थीटा स्थति में सपनों की दुनिया में पहुच जाते है. उसी तरह शराब का सेवन उन्हे एल्फा या थीटा स्थति में ले जाता है जहां वो आराम का अनुभव करते है. पर इन ड्र्ग्स के खतरनाक दुष्परिणाम इनके उपयोग को बेहद सिमित कर देते है.

लय और रिदिम पर आधारित विधिया ध्यान और रिलेक्शेश्न के लिये खोजी या विकिसित की गई. जो सदियों से लोग इस्तेमाल कर रहे है. जेसे झूमना, झूलना, ड्रमबीट्स पर नाचना या थिरकना, या फिर बस सुनना, सूफीयाना स्टाइल में गोल गोल घूमना. बेली, कथक. मदिंर या गिरजाघर में बजते घंटे घंटीयां की आवाज. ताली पीटते और गरदन दांये बांये घुमाते हुये ध्यान और आराम का अनुभव करना. शास्त्रीय संगीत भी हमे इसी कारण एक आत्म शांति का अनुभव कराता है.

एक छोटा सा प्रयोग करके देखे. आंखो को बंद करे और शरीर को डीला छोडते हुये गरदन को दांये और बांये अपनी आराम सुविधा के अनुसार जितनी दूर ले जा सकते है ले जाते हुये एक लय में झूमते हुये कुछ देर तक हिलाना शुरू कर दे. आवृति 50 से 80 प्रति मिनिट और उसके बाद महसूस करे कि केसा लगा. पर ध्यान रहे जिन्हे गरदन दर्द रहता हो या फिर अगर ऐसा करने से चक्कर आते हो तो ना करे.

एक और प्रयोग करके देखे. हाथों को दांये बांये पूरा फेलाते हुये आंखे बंद कर तेजी से घूमना शुरू करते हुये कम से कम 10 चक्कर पूरा करे. अब यही आंखे खोल कर करके देखे. कोन सा असान था और क्यों. अच्छा इस बार घूमते हुये आंखे बंद कर किसी आसान से गण्ति के जोड को करके देखे देखे जेसे 79+13+37=?...देखा चक्कर आने लगा ना....यही इसकी खूबी है. आप इस तरह घूमते हुये चाहते हुये भी कुछ सोच नहीं सकते क्योंकी सोचते है आपका संतुलन बिगड जायेगा. इसी सिद्धांत को इस्तेमाल करते हुये एक सूफी फकीर घंटो ऐसा करते हुये गहरे ध्यान में उतर सकता है.

कुछ बोडी मूवमेंट्स की विधियों का ग्राफिक विवरण दिया गया है. ज्यादातर से आप प्रचलित होंगे. ये सब विधियां रिलेक्स, या फिर ध्यान में लिये इस्तेमाल की जाती है. इसमे कुछ को जरूर करके देखे और उसका प्रभाव देखें

बाजार मे न्यूरल बीट और ब्रेन बेव पर आधारित ओडीयो उपल्बध है जिसे उसके प्रकार के अनुसार मस्तिक तंरगों को उत्तेजित करने के लिये किया जाता है जिन्हे सुनकर आसानी से आप रिलेक्स, फोकस, और क्रीयेटिव, या ध्यान का अनुभव कर सकते है. नींद ना आ रही हो तो इसे सुनकर गहरी नींद के लिये मन को तैयार कर सकते है. अगर गहरी नींद और थकान हो रही है और जागना या सजग रहना जरूरी है तो यह आपको सजग और उत्तेजित रखेगी.

रात को बिस्तर पर लेटने से पहले किताब पढ़ना अच्छा लगता था पर इधर कुछ महिनों से एसा करते ही पलके नींद से भारी हो जाती और 2 से 3 पेज भी पढ़ना मेरे लिये असंभव सा हो जाता. जब मेंने सजग रहने में मदद करने वाला ब्रेन बेव पर आधारित ओडीयो अपने आइ पोड से हेड फोन लगाकर सुनते हुये किताब पढना शुरू की तो आशचर्य जनक परिणाम मिले और आसानी से मेंने जब तक चाहा किताब पढता रहा. वो भी बिना किसी थकान और नींद का अनुभव किये. उसके बाद नींद लाने वाला ओडियो लगाया और कब नींद ने आ घेरा मुझे पता ही नहीं चला. आज कल रिलेक्स होने के लिये या फिर सपने देखने के लिये अकसर इसे इस्तेमाल करता हू.

यह शुरू शरू में सुनते समय अरूचिकर और अनचाहे शोर जेसा प्रतीत होंगी आप उस पर ध्यान ना दे और उसे अपना काम करने दे और आप अपना काम करते रहे. अगर आप सहन नहीं कर पा रहे है तो उसका वोल्यूम को कम करके देखें. अच्छा हो उसका वोल्यूम आप कम से कम इतना तो रखे जितना आप अकसर पोप संगीत सुनते समय रखते है. कुछ समय बाद इनसे डीस्टर्ब हुये बिना काम करने की आदत सी बन जायेगी वेसे  ही जेसे  बस की खड, खड भड भड की आवाज आपको गहरी नींद में सुला देती है.. और अगर हजार कोशिश के बाद भी ऐसा ना हो तो साफ है की यह विधि आप के लिये नहीं है. :)
याद रहे इन्हे हेड्फोन लगाकर सुना जाता है. क्योंकी यह न्यूरल बीट्स पर अधारित होते है. दांयॉ और बांई ध्वनी मस्तिक के अदंर पहुचकर कम आवृति की बीट्स बनाती है जो चाही गई मस्तिक तंरगों को उत्पन्न करने मे मदद गार होती है.

फ्री mp3 ओडीयो ब्रेन बेव सेम्पल के लिए आप मुझे vichar2000@gmail.com  पर मेल कर सकते है.



Tuesday, November 15, 2011

porn addiction

clicking on this article indicate that it has generated interest in you, or you are reading because you are my friend...or may be it is because, Pornography is everywhere and you are trying to prevent it on your computer. May be you have a problem with Pornography. May be you know someone with a problem in porn. Whatever the reason, you cannot deny the word pornography as a very popular topic.
Regardless of any technical definition of internet porn, there is something clearly powerful about internet porn. Something simply anyone can do is just go in Google and type the word "sexy girl" in the search bar and see how many results comes up. This is not just like picking up a magazine at a liquor store or going to an adult store. You cannot see "millions" of these stores just around the corner like they are on the the internet.
So may be, we should just not type in "sexy girl"? Sounds pretty simple right? Don't type in any nasty words and you should be fine isn't?? ok type a simple word "hot" and see. Even then you will see something which you never wanted to appear on your computer screen. Sexual ads displayed all over the internet, television, magazine. Big hording around the street corner displays tempting pictures. The advertisers know just how big sexual advertising is. So as you know, the sex industry can be just to overwhelming for some to handle. Sex sells and it is just plain obvious.
This article is for those who are net addicted for pornography. They get tempted to such a extent that they risk there professional life, they risk there families and friend. They know that whatever they are doing is bad and still indulge. After passing of the euphoria they fills with guilt fear and confusion. They daily come out with a pledge and with a promise not to see porn but then again urge comes and take over all promises which they make to themselves. this cycle goes on repeating, and they see no end to it. some of them accept this as there reality and live with it.. others go on fighting with themselves. Till one day they get caught red handed humiliated by public, by friend, by colleagues and by law of the state. Many of them get trapped in black mailing...which altogether a different problem.
Before going further on this pose these question this to your self and try to get true answer.
Do you think Porn is dangerous to our society?
Is it a addiction ?
Like many compulsive behaviors, porn addiction is secret addiction. Friends, family and colleagues may be very disappointed if they knew about it, one feel empty and worthless. It has nothing to do with real sex!
Feelings of loneliness, boredom, insecurity or just having the opportunity can all result in porn addiction. Porn is a fraud because it promises something it never deliver. One use it to escape reality but it actually worsens the very reality. Pornography addiction can make one feel bad about self, unbalance, waste time and money.
Pornography addiction blunts the senses and stops you appreciating life. the more one view the more he wants to view even more, Pornography addiction has a kind of negative hypnotic effect, grabbing then locking your attention until you 'wake up' from the porn trance feeling exhausted and miserable. One may go for days, weeks or months without using porn and then almost without you knowing it you're back into it again. Pornography addiction can make you feel bad about yourself, unbalance your attitude to sex, damage relationships and waste your time and money.
Do you think porn can be danger to our children? The real threat comes from those who would take advantage of kids who naively reveal personal information about themselves. Rebellious teens are especially at risk, because they may not take parental warnings seriously. The more children who risks themselves to view porn, the more our society takes a risk as a whole to our morals and more importantly our families.
So we know that porn can be a danger to our children and families as well as ourselves of course. now lets see .. is Porn really addictive? How much so? Is it more addictive then drugs??
online porn addiction can be as bad as crack or heroin addiction. Pornography addicts have a more difficult time recovering from their addiction than cocaine addicts, since drug users can get the drug out of their system, but pornographic images stay in the brain forever. Pornography really does, unlike other addictions, biologically cause direct release of the most perfect addictive substance. The brain really does release certain chemicals in sexual arousal. The images can stay in our brain over a substantial period of time.
The costs of sexual addiction can range from emotional and physical health problems to legal, professional, and family disorders. Many sex addicts suffer from broken relationships. They experience severe marital and other relationship problems. Even the partners of sex addicts may develop their own addictions and compulsions, psychosomatic problems, or depression and other emotional difficulties.
Are you caught in a downward spiral of viewing more and more perverse sexual porn? Do you avoid sexual intimacy with your partner in favor of masturbatory porn stimulation? Have you started to "act out" by calling phone sex services or visiting massage parlors? Are you ashamed of your behavior but can't seem to stop? Are you too embarrassed to seek help in a public venue?
That's the reason I am writing about addictions to pornography. This is a huge problem all over world and really needs to be paid attention to like never before. Getting the word out about these addictions and problems in our society is what I intend to do. I am sincerely hopeful this message spreads just as fast as the advertising sex ads, the release of these chemicals sex arousals in our brains and the growing popularity in the subject.
The very first effort is to read this article carefully, and keep eye on the next article releasing shortly. It is on how to over come addiction. Reason for keeping the solution out of this article is to keep the article short, generate curiosity. and to filter out serious intenders with whom to proceed further on remedies n solution.
Remember solution is not one line solution or one night solution. but certainly tips will work on you. Follow the advice without thinking too much on its workability, a little faith from you and then rest will be a history which you will be proud owner. and become a best examples to the others to follow....RIGHT dear!!!
oh! no!! Ii am not going to charge you any fees for that...so dont be scared. I want only one commitment form you that if you benefit form advice then PLEASE SPREAD THIS MESSAGE ACCROSS THE INTERNET USER

next post....

In previous post porn addiction was discussed in detail now lets talk about remedies. As we understand that subconscious mind is the area form where the addiction germinate and soon becomes very big tree. so we need some method for communicating and modifying subconscious impulses and reaction so that we can stop nourishment to this tree. this will result into stopping its further growth and day by day it will get weaker and weaker and one day it will be easy to root out.
Most of the compulsive feeling comes when you are alone. So consciously take first step for not to remain alone to the extent possible.
Guilt and fear makes the addictive behavior stronger because Guilt and fear makes you believe that you are weaker in over coming this problem, it makes the problem look much bigger and complex then it is and you feel weaker and weaker that makes your belief stronger that you can never come out of this addiction. First step towards overcoming this addiction is to stop guilt as you have not done any serious life threatening crime, yes it can be fearful because it is against law of state but it is not against natural law. Make your self understand that this type of behavior is a very normal outcome of the possibilities available with you.
You now understand that you want to modify this behavior because it is killing your time, because your friends and family think it is bad, because it is violating law of state, Because this makes you less productive, because this makes you fearful. Because this makes real sex less pleasurable. Like that it can be 100's of valid reasons because of which you want to over come this addiction. Give a serious thinking and list out all those reasons which you feel are real logical reason as per your belief system. This is important step in overcoming addiction so stop reading further and make this list right now.
Sex addiction is linked with pleasure. Whenever you see something sexy or you think something sexy immediately our brain releases chemical which generate pleasure. Can we train our subconscious not to release pleasure chemical and instead of that it release nothing or releases chemical which generate pain. Yes we can do that by modifying subconscious reactions.
It is always a thought which comes to your mind, and more you think on it more it get stronger and then with a drift of sensual pleasure makes you do what your subconscious desire you to do. As if you are slave to your subconscious mind. These thoughts can be easily terminated when it first comes to your mind by giving no attention to these thoughts. If I mean no attention ...I really mean that not to give any attention...whatever kind it may be... just allow it to pass. Or divert your attention to something else. As soon as you divert or stop giving attention to the thought it gets weak and after few seconds it fades out completely.
It is a very normal process you carry out daily to your selves. This time you do this with sex thoughts. And let us see if it works on you or you really feel too weak on these thoughts.
If you feel too weak don't fight on the thought or pass any judgment just accept this as your reality and do what ever your subconscious compel you to do but repeat some of the thoughts in your mind from the list you just prepared against this addiction. Just repeat these thoughts as mantra in your mind while your body performs the act as per the desire of subconscious. After few session only your conscious will become strong enough to give you enough strength to stop unwanted act.
Make it a habit to repeat these thought from the list 4 to 5 times a day, specially before and after sleep you repeat these thought as mantra because at these moments conscious mind is weak and subconscious easily accept these thoughts.
All the time any act we decide to do before an act is performed we judge the act for pain and pleasure when our judgment is in favor of pleasure we carry out act and if it is against the pleasure we avoid. Such judgment take place all the time without you knows consciously. With time thoughts which you used as mantra will settle down in subconscious and sooner or later it will become part of the judgment. I asked you to stop feeling guilty because in guilt we subconsciously choose pain so that we can give to our selves punishment we deserve.
Desires of such addition are generated from subconscious mind. Subconscious reaction can be modified by seeding new pattern of behavior. but conscious mind is a main barrier for the information to be passed to subconscious. to over rule and bypass conscious mind, self hypnosis is best tool. It helps in passing and setting the new modified behavior information directly to subconscious mind. Below i am giving you sample self hypnosis script. Read script into a recording device like your ipod or mobile. and then listening frequently. It is best way to communicate with your sub conscious mind.
This script do not expect deep hypnosis. We all experience mild hypnosis during day to day work like reading, driving and listening to the music. a very mild hypnosis also will do the magic. specially your own voice make things much easier. dont worry if you make little mistake while recording
it works wonder if you can listen to your recording before sleep and after sleep...yes you can use auto stop function to stop player so that you don't need to wake up to stop recording. headphone are better as it keep your privacy intact. ... while recording script read very, very slowly in your recording device. Pretend that you are tired as you read this exercise and you will react in a relaxed, sleepy manner. Whenever you see these ... (periods in row) that is your signal to pause as you read, to let your body relax or allow thought to settle down / perform action before continuing on. recording is divided in 2 phases...phase 1 produce mild hypnosis where phase 2 is the message to modify subconscious mind reaction.
Script: record this script as it is ....
(phase-1)
Make yourself comfortable... gently allow your eyelids to close... now take a full deep breath and exhale completely all the way to the bottom of your lungs, continue with rhythmic breath ...... deep breath bringing more relaxation and all stress tension and worries are going out as air goes out of lungs, rhythmic breath Letting yourself to relax.... as u fills your lungs with clean, refreshing air, u feel good and u feel more relaxed.. At this moment in time... Nothing matters... you switch off your thoughts... And allow this time for yourself... So that you can unwind completely... And you begin to feel more and more relaxed... Letting go of any worries or problems... That may have been on your mind lately... And there is no need to fight any unwanted negative thoughts... As they will soon drift out of your mind as easily as they came... continue deep breath and focus your attention on your toes ... allow your toes to relax completely.... each toes is loose and heavy.... now let the relaxation flows to the feet..., into your ankle..., your calves..., your knees....feel the heaviness on your knees. Your legs are getting heavier an immovable... feel the sensation of warmth, feel it flowing into the thighs..., into your hips..., into your waist..., flowing up to your belly.... your belly is relaxed....relaxation feeling moves further to your chest.... your breath is easier and deeper...it is now more regular and more relaxed.... let the more relaxed feeling moves to your shoulder.... down to the arms....fore arms and into the hands.... and to the fingers.... the deep relaxation flowing in the neck...it moves up to the face... the chin... the cheeks...are fully relaxed....the micro muscles around eyes are relaxed.... the cool soothing relaxation run all around your face.. whole body in deep relaxation..eye lids heavy n smooth.... the cool relaxation feeling going to your forehead. ...over the top of your head.... and down back of your neck...
... A feeling of calmness and contentment... As you feel every muscle in your chest and abdomen... Become limp and relaxed... And all the muscles in your back are relaxing... all the way down your spine... The muscles loosen and relax... And as you drift down deeper and deeper relaxed... You let this wave of relaxation spread all over ... As you begin your journey into your own inner world... To that unique and special part of you... That only you can go to... You continue to let go... Of any negative thoughts or feelings...
And any sounds around you... Or in the distance... Will fade into the background... The only sound that will matter to you... Will be the sound of my voice... Which will continue to take you deeper and deeper... .. And it doesn't matter where you drift... Where you go... My voice will travel with you at all times... So that you will continue... To respond to me on an unconscious level... Deeper and deeper relaxed... You are in deep relaxation. Whatever you are going to listen will go deep into your subconscious mind
(phase-2)
you started pornography to experience a new way now you have enough experience. you want to move ahead in life and want to experience and learn new things. you understand that Pornography makes you feel bad about yourself, it makes you unbalance, and it is a waste of your time and money. Like many compulsive behaviors, porn addiction is secret addiction. Friends, family and colleagues are very disappointed to know about it, it fills you with feelings of loneliness, boredom, insecurity.
Porn is a fraud because. it escape you from facing reality and it actually worsens the very reality. Pornography addiction blunts your senses and stops you appreciating life. Porn trance exhausts you. Pornography addiction makes you feel bad about yourself, and unbalance your attitude to sex, damage relationships and waste your time and money.....you understand that solving day to day problems are more satisfying then avoiding them. you understand that pornography is taking away from your goal.... it is problem to you and not a solution to the day to day problem.
you have the inner strength to say no to the porn. you get rid of all pornography material immediately as it comes to your notice without fail. like movies , pictures , all electronic images, videos, stories, articles, novels you own ... you destroy or delete them permanently. stay off of the computer if it is a temptation. DO NOT get on the computer if it is a temptation.
Whenever you see porn it will generate headache in you. It will generate bad stinking smell all around you . it generate rough sticky wrinkled touch sensation. It is stinking as shit it smells too bad you can't hold it any more, it is like a bucket full of shit and you are looking at it. A very bad experience. your mind reject and immediately move out of it.. you move past without giving any importance to it as easily as you avoid stinking garbage's.....
you think well... you think fast... you think clear... you think organized...you remain cool and calm but whenever you see any porn picture. you are uneasy and experience tremendous dislike and you immediately get rid of it. Whenever you see porn the picture of stinking shit fills your vision. your nostrils fill with the unbearable stinking smell. you can not bear this smell you immediately move eyes out of porn.
you understand that Porn pictures are just naked body nothing sexy about it. Pictures of naked body don't excite you. You remain in total control of your feeling your emotions your attitude...and your needs... you control them.... They have nothing extra ordinary. As soon as you move away from porn you are in total control of your self...your headache vanishes and you feel refresh...relax and smiling ....
You are exceptional human being... you have strength, power, conviction and confidence to say no to the porn. Pornographic pictures no more attracts you. You have lot of energy n you are alive.... you enjoy life. people likes you and you feel good .... you turn problem into advantage. You are in control of yourself in every way at all times in all situation. You are organized and in control of your thought... your time...your action and your future. Porn no way disturbs or distracts you any
You have enough experienced about porn now you want to go ahead for new experiences. Real World around you is more exciting. you enjoy interacting people around you.......
(phase 1 cont...)
next time you listen to this recording it will go more deep in your subconscious. Now you are filling with joy and happiness you are feeling refresh energetic. ....Whatever thought you were listening have gone deep and settled into your subconscious mind... When I count to five... you will be wide awake...feeling good...One...you're beginning to come back...Two... feel the energy start flowing through your body...Three...moving your fingers and toes... more and more awake...feel the energy running through your body more now...Four... breathe in wakeful energy... that's right... breathe in wakeful energy... clearing your head... balancing your energies... feeling wonderful in every way...Five... open your eyes... fully coming back... fully back... wide awake... that's right...wide awake.
script ends...
you can customized script but remember the phase.... phase-1 is to relax [ where u relax your mind and body and allow your conscious mind to rest so that it don't generate unnecessary arguments. and hence whatever you listen settles deep in u.
you may fall sleep while listening to this recording...... never mind its a good indication. listen to recording at least twice a day..specially before the night sleep. you may notice that in spite of listening to the recording and getting into self hypnosis successfully you may feel urge to view porn. if that's so..then simply go ahead don't stop yourself forcefully..or argue with your self. but surely one thing you can do while viewing porn is repeating central idea of the recording mentally. and i am sure you won't feel that good viewing and doing porn and the day won't be far way when you suddenly react subconsciously that if its so bad then what the hell i am doing with this shit. and that the winning point. and i bet form this point onward you will be a proud owner of modified behavior.
you can repeat mentally phase-2 ideas any time during work hour or while driving ....or simply listen to that recording. phase 1 helps you in giving better result. so due to any reason you are not able to use phase 1..you can straight way use phase 2. like during driving pahse 1 is not allowed. Because driving itself generate mild necessary hypnosis so you can straight way use phase 2 more over you dont have to listen to those word consciously...so you keep on doing your normal work allow these recording to play and let your ear pass this sound directly to your subconscious mind...right
Please give your valuable advice on this issue. we all know that we can not stop sex and pornography on net. But certainly we can come out with the best remedies. please post if you have any in your mind. Any adivce which helps the addicted to come out, without damaging the delicate beliefs and with minimum efforts.
please write to me on the issue how to come out of prono addiction...and what to do for not getting trapped into it.